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सौरभ स्मृति

चलो छोड़ कर जाना था .... पर ऐसे तो न जाना था जाने की वजह जाने से पहले उसको तो बताना था वो अब किससे रोयेगी वो अब किससे गायेगी रातो में जो सपने देखे वो भोर में किसे बताएगी जो वादा तुमन...

तारा

दूर आकाश में एक तारा खूब तन्हा,खूब बेचारा टिम टीम टिमटिमा रहा लेके खुद का सहारा भोर है होने को आया तब भी जगमगा रहा है सीधे सीधे नयन वो सूर्य से मिला रहा है उसको खुद के मिट जाने का कोई भी भय नही है जनता है डर डर के जीने में लय नही है औरो की तरह वो भी चाहे तो कर ले किनारा दूर आकाश में एक तारा खूब तन्हा,खूब बेचारा वह सूरज से कह रहा है "देख तेरी औकात क्या है कहने को मुझसे बड़ा है तो बड़े होने में बात क्या है जनता हु तोप दोगे मुझे अपने उजालो से पर तुम जूझते रहोगे अपने इन सवालों से की मुझे स्वाभिमान अपना है कितना प्यारा दूर आकाश में एक तारा खूब तन्हा,खूब बेचारा टिम टीम टिमटिमा रहा लेके खुद का सहारा