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Showing posts from July, 2017

कुछ गायन में.

 मुक्तक....   मैं दिन भर रो नहीं पाता ,रात भर सो नहीं पाता  मैं जिन्दा हु मगर फिर भी क्यू जिन्दा हो नहीं पाता  इश्क़ करके क्या गुनाह किया मैंने मेरे मौला  मैं गंगा भी नहाया हु पर इसको धो नहीं पता  जो कल को दोस्त होते थे, वो अब फसाद करते है  ये आंसू आज भी उनसे बहुत फ़रियाद करते है  इतने दिन में बदली तो बस एक बात बदली है  की वो हमे याद करती थी पर हम उसे याद करते है  कोई आँखों में ही खोया था , कोई आँखों में ही खोया है  इश्क़ जिसने भी किया हैं रात भर कौन सोया है  रकीब और मुझमे तो बस बात इतनी है की मैं भी खूब रोया हु और वो भी खूब रोया  है निगाहे मिल जो जाएँगी , दिल खो ही जाता  है कहा  कोई  लौट  पाता इसमें  जो ही जाता   है कौन चाहेगा कैद होना इन कैद खानो में  इश्क़ को कौन करता हे ये तो बस हो ही जाता  है मोहब्बत के ही पाले में ये क्यों इल्जाम होता  है नुमाइश दिल टूटने पर क्यों सरेआम होता  है मौत अपनाने से कुछ नहीं मिलता...

भूल गई

अपना बना कर मुझको जो अपनाना भूल गई दिल पे नाम लिख कर खुदका मिटाना भूल गई  शायर मुझको बना दिया पर गीत सुनाना भूल गई  आंसू आँखों मैं भी देखे पर पस्ताना भूल गई पंछी तो उसको सब कहते थे बस पंख लगाना भूल गई मुझको हवा में भेज कर अपने आना भूल गई  अपना बना कर मुझको जो अपनाना भूल गई

पैसो का रिवाज .............

ए खुदा...... अब तू अपनी गद्दी छोड़ दे पाप का आलम इतना बड़ा अब निज़ाम मोड़ दे क्यू हो गया इस दुनिया  मैं पैसो का इतना महत्व क्या करे गरीब ,  क्या ये दुनिया छोड़ दे क्यों नोटों के बिना काबिलियत खो रही हे  ये सब देख सोने की चिड़िया रो रही हे क्यों न ख़त्म कर दे पैसो का रिवाज सायद इंसानियत फिर कर ले धरती पे राज।

आज कल....................Gazal

ठहरता नहीं आँखों का पानी आज कल याद आती है जब कोई बात पुरानी आज कल भूल जाने का रिश्ता नहीं था हमारा उसका पर पड़ती हे कुछ बात भूल जानी आज कल मैं अवारा था सायद इस  वजह वो भूल गए लगता हे मेरी बाबू हो गयी सयानी आज कल शौक कहा था ग़ज़ल वजल का हमको बस मोहब्बत में ये लगती हे सुहानी आज कल यहाँ वो रो रहा है , वहाँ ये रो रहा है बस मोहब्बत में हे यही सबकी कहानी आज कल

एक साल.....

बहुत याद आये वो '' एक साल हमको '' लगते थे वो पल बेमिसाल हमको वो तेरा रूठना वो मेरा मानना वो एक दूसरे को कसमे दिलाना उस पल था मेरा ख्याल तुमको तेरा ख्याल हमको  बहुत याद आये वो '' एक साल हमको '' जिसे देखो सब हमसे जलते थे मन में लोगो के क्या क्या सवाल पलते थे फिर भी हम साथ ही चलते थे तेरे साथ चलना लगता था कमाल हमको  बहुत याद आये वो '' एक साल हमको '' जाना पड़ गया था जब फैज़ाबाद तुमको कहाँ कोई करता था उस पल याद तुमको जो भी थे उस पल खास तेरे तेरे खासो ने ही कर दिया बर्बाद तुमको इन बातो से वैसे क्या लेना देना फ़िलहाल हमको बस बहुत याद आये वो '' एक साल हमको '' तुझ बिन अब हम क्यों मुस्कुराये कैसे जिए कैसे मर जाये कोई बुलाये तो फिर आवाज तेरा आये कौन मिल गया की भूल गयी हम तेरे फैसले ने किया बेहाल हमको  बहुत याद आये वो '' एक साल हमको '' लगते थे वो पल बेमिसाल हमको  

ये अंधी अँधेरी हे

ये अंधी अँधेरी है बस तेरे आने की देरी है तू मिल जाये मुझको तो पूरी दुनिया ही मेरी है ये तेज़ हवाएं चलने दे ये मौसम को बदलने दे ये अफ़वाए जो पलती  हे उन अफवावो को पलने दे ये बदनाम करने की तुझको हेरा-फेरी हैै पर तू मिल जाये मुझको तो पूरी दुनिया ही मेरी है  माना दिल उदास बहुत है पर आंसू में प्यास बहुत है लोग कहते हे कहते रहे मगर तुमपे विश्वास बहुत है तुम लौट नहीं सकती पर उम्मीद और आस बहुत हैै हा  माना तेरा गुस्सा होना भी जरुरी है पर तू मिल जाये मुझको तो पूरी दुनिया ही मेरी है ये दिल जिद करता है की तुम्हे फिर दोस्त बनाना है तू रूठी हे मुझसे तो तुझको फिर मनाना है दुनिया के नज़रो में तुम्हे फिर उठाना हैै उदास मत हुआ कर पता हे तेरी भी कुछ मजबुरी हे पर तू मिल जाये मुझको तो पूरी दुनिया ही मेरी हे 

Ek ladka

एक लड़का तुझको देख के आहे हे भरता -२ वो मंदिर में भी जाता है , वो मज़्जिद पे भी जाता है पर कोई उसके दुआ को काबुल ही न करता सिकवा क्यों हो मुझसे अब , गिल्ला  क्या हे मुझसे अब मुझे देख क्यों तू बदल देती हे रास्ता एक लड़का तुझको देख के आहे हे भरता मै तो यार था तेरा , जाने बहार था तेरा तो अब मेरा नाम सुनके क्यों तेरा पारा हे चढ़ता  एक लड़का तुझको देख के आहे हे भरता

पहले अये दिन.................. Gazal

पहले अये दिन उनसे प्यार होता था हर पल मीठा सा तकरार होता था जुबान मेरी जो बंद भी हो जाती नज़रो से ही इज़हार होता था चोट उनको अक्सर लगती थी जब भी हमपे कोई वॉर होता था शोहरत , दौलत जितना भी हो एक मुस्कान के आगे  सब बेकार होता था।।