भूल गई
अपना बना कर मुझको
जो अपनाना भूल गई
दिल पे नाम लिख कर खुदका
मिटाना भूल गई
शायर मुझको बना दिया
पर गीत सुनाना भूल गई
आंसू आँखों मैं भी देखे
पर पस्ताना भूल गई
पंछी तो उसको सब कहते थे
बस पंख लगाना भूल गई
मुझको हवा में भेज कर
अपने आना भूल गई
अपना बना कर मुझको
जो अपनाना भूल गई
जो अपनाना भूल गई
दिल पे नाम लिख कर खुदका
मिटाना भूल गई
शायर मुझको बना दिया
पर गीत सुनाना भूल गई
आंसू आँखों मैं भी देखे
पर पस्ताना भूल गई
पंछी तो उसको सब कहते थे
बस पंख लगाना भूल गई
मुझको हवा में भेज कर
अपने आना भूल गई
अपना बना कर मुझको
जो अपनाना भूल गई
Comments
Post a Comment