तुमने क्या बना दिया ....

क्या था मैं अब तक तुमने अब क्या बना दिया
पत्थर को कब आया था पर तुमने उसको रुला दिया
जब तुम थे साथ मेरे
कापियां सूनी पड़ी थी
पर आंखों में खुशियां
एक तरफ दूनी पड़ी थीं
तेरे साथ रोए भी थे
पर तुमने हंसना सिखाया
जिंदगी का लुफ्त क्या है
तुमने हमको बतायां
पर तुमने तब हंसा के अब हमको सता दिया
क्या था मैं तब तक तुमने अब क्या बना दिया
मैं नहीं पेंसिल था
तुमने तो हम को गड़ा
तुमने जब हमको गड़ा
तो मैंने खुद को पढ़ा
किताबे गीत ग़ज़ल की
अब मैं पढ़ने लगा
तोड़ा सा गढ़ दिया था तुमने
फिर मैं ही खुद को गढ़ने लगा
ज़िन्दगी का एक मक़सद तुमने हमको दिखा दिया
क्या था मैं अब तक तुमने अब क्या बना दिया

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