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Showing posts from March, 2017

Koun mera ............

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तुम तो मेरी अपनी थी , दुनिया मैं  एक जमाना था। टक्को पे अपने जीते थे , फूलो से दिल का फसाना था। यारी के ज़िन्दगी जीते थे , गलती  पे संग पस्ताना था। तुम तो मेरी अपनी थी , दुनिया में एक जमाना था। कुछ किस्से हम सुनाते थे , कुछ गम वो बताते थे। कैसे भी हो हालात यारो, साथ रोते और मुस्कुराते थे। लगाव था उनको भी मुझसे , में भी उनका दीवाना था। तुम तो मेरी अपनी थी , दुनिया में एक जमाना था। शराब से कोई वास्ता न था , वादे को निभाना था। जब भी फोन आता था उनका।  एकांत मैं बतियाना था। सरार सा गुजर वो पल , जो प्यारा सा रुबाना था। तुम तो मेरी अपनी थी , दुनिया में एक जमाना था। बाबु कह के पुकारते थे। उनको सोना कह के बुलाना था। ये भी एक जमाना हे। वो भी एक जमाना था। बाते अब होती कहा हे , दीदार कर के , दिल को समजना हे। वो भी एक जमाना था। पर ये केसा जमाना हे। कल जो मेरी अपनी थी , आज वो बेगाना हे। वो भी एक जमाना था , ये भी एक जमाना हे। बाबु मेरी जानम हे , बस आँखों में चश्मे-इ-तराना हे। तू तो मेरी अपनी...

kaha uske jaisa koi ayega ..

रुठु उनसे तोह अब कौन मानाने आएगा। कौन मेरा अब हाथ पकड़ कर आँखों मैं देख मुस्कुरायेगा। दर्द  कोई भी हो , बस याद वही पल आएगा , वो जब हमसे कहती थी तू दूर कभी न जायेगा। लिखते -लिखते रो रहा हु ,दिल बस यही कहता है। अब उस पगली की तरह कोई और न बन पायेगा। हर शाम दिल यही पूछता है , वो कब वापस आएगा। क्या जवाब दू दिल को , दिमाक ये कहा , बता पायेगा। जो सत्य बता  भी दिया , तो दिल ज़िन्दगी भर पस्तायेगा। यकीन नहीं होता है मुझको , अब कौन मुझे सताएगा। जब मैं चुप चाप बैठा रहूँगा , आहिस्ता आवाज कौन लगाएगा। जब मै छत पे टहलूंगा, तो फ़ोन किसका आएगा। अब मुझसे गुफ्तगू के लिए, SMS पैक कौन डलायेगा। लिख रहा हु बस दिल-o-राहत के लिए  वरना मेरा दर्द शब्द कहा बया  कर पायेगा। होती रास्तो से दूरिया तो बात कुछ और होती , दिलो के रास्तो पे कोई वाहन कैसे जायेगा। कौन अपने बोतल मैं पानी मेरे लिए बचाएगा। कौन अपने टिफ़िन मैं पिज़्ज़ा मेरे लिए लाएगा। अब इस पीतल को कौन सोना कह के बुलाएगा। अब इस ज़िन्दगी मैं कौन उसके जैसा आएगा। अब कहा कोई उसके जैसा अपना बन कर आएगा कहा पता  ...

Mout apna hai

सोच रहा हु मौत आजमाने को , जा रहा प्यार बढ़ाने को।  सुना हे दुसमन भी आते हे ,  अपने बनकर दुःख जताने को  जा रहा मौत आजमाने को। क्या हे ज़िन्दगी मैं , थोड़ा गम ,थोड़ी ख़ुशी। क्या बताये ज़िन्दगी इस दीवाने को, जो तड़प रहा मौत आजमाने को।  मोहब्त देखि , दौलत देखि , सोहरत देखि  तड़प रहे अपने दूर जाने को।  तब कह रही मौत पास आने को।  कितनी दिल दार हे मौत। छोड़ दिया सबने तब वो बुला रही है, तन्हाई मैं अपना आशिक़ बना रही है।  अगर होती हमारी किस्मत , विशाल-ऐ-यार को।  तो कहा देखती ज़िन्दगी इंतज़ार को। कौन जाता फिर ज़िन्दगी छोड़ , मौत के बाजार को।   जी रहा हु मौत के इंतज़ार को।   मौत कितना प्यारा हे ,  देखना  होगा।  जो होता होगा फिर से जनम , तो फिर यही धुप सेकना होगा।  जा रहा हु बदलो के सैर को , छोड़ के धरती पे अपने , गैर को।  देखना चाहता हु , दूर से ज़माने को।  जा रहा हु , मौत आजमाने को।     विशाल-ऐ -यार   ---   यार से मिलन

Tadap

रोता रहता अंदर हज़ारो मैं,  कैसे दिखाऊ तन्हाई बाज़ारो मैं। तड़प  तड़प के शायरी लिख देता हु , अब नहीं आते अंशू अन्हारो मैं। एक दिन सवाल किया रब से , रब ने कहा , कई पड़े ऐसे फिसूल प्यारो मैं मैं। तड़प तड़प के मैं इज़हार करता , हा मैं यार को थोड़ा-थोड़ा प्यार करता।  क्यों मेरे आँखों मैं गुलाब जल मिलता है , सयाद उनके दिल मैं किसी और के लिए कमल खिलता है। पुराने सब रास्ते वो भुला दी है , नए रास्तो पे चल  के वो मुस्कुरा दी है।

किराये का मकान.....................उसका दिल

किराये के मकान में था मै रहता गंगा के धरा सा मैं बहता खूब बनती थी माकन मालिक से मेरी एक बार होइ कुछ पल की देरी  माकन मैं गया तो देर हुई मालिक मेरी गैर होइ मालिक से फिर थोड़ा बात किया मालिक ने फिर माकन मै जगह दिया दोस्ती की इबाबत मोहब्बत बनी दिल मेरा कई ख्वाब बुना मगर इजहार कर के जो मैंने गलती की  उस गलती हर्जाना मेने दिया कई गुना बात उसकी भी सही टी दोस्त मानते थे हमे मैंने ही मोहाब्बत ,चाहत और वफ़ा के गढ़े खने बाते कम हो गईं राते गम हो गयी आखिरी लव्स उनोहोने हमसे कहा ''चीड़  होती हे तुमसे कोई रिस्ता न रहा'' आँखों से पानी बहने लगा पता चला माकन में कोई और रहने लगा।

पहले का जमाना ......

पहले का जमाना , जमाना  था आदम उम्मीद भी थी , सुकून भी था। पता नहीं केसा परवाना था आदम।  सोहरात , रुपैया काम ही सही , आबरू का दीवाना था आदम। पहले का ज़माना - ज़माना था आदम। जल्दी देरी तो लगी ही रहती पहले ही इस देश मैं आना था आदम। दादी जब अपनी यादे बताती , लगता हे वो भी ज़माना था आदम। स्वर्ग कहा आशम में होगा , बिछड़ो को धरती पे लाना था आदम। वो भी ज़माना -ज़माना था आदम जश्न न सही शामे तो होंगी समय  को वही  रुक  जाना था आदम। वो भी ज़माना -ज़माना था आदम अब की बात मैं  क्या बताऊ लोग बहुत हे , चेहरे बहुत हे दूरिया को न बढ़ाना था आदम।  वहि ज़माना -ज़माना था आदम। रुसवाई करूँगा आज कल का में  हमको भी जन्नत दिखाना था आदम। वही ज़माना -ज़माना था आदम। सेवा था , मन जान बहुत था  , घर मैं टूटी खटिया ही सही , पर दिल में मकान बहुत था। कुछ पढ़िए इस ज़माने के बारे मैं। .........  सुबह को माखन - ब्रेड , शाम को कढ़ी हे .   बहार एक गाड़ी कड़ी है  / गाड़ी में बैट के रुतबा है पाया  २ रुपए कमाया , १०० रुपए उड़ाया, बाप का पैसा हे ...

Koi Apna hota hai

कोई अपना होता है। कोई बेगाना होता है। कही कही बिन चाहे किसी को अपनाना होता है न जाने कैसे गैरो से दिल लगाना होता है।     जिसके लिए निकले उसके लिए 'पानी' होता है जिसको निकले उसके लिए 'दर्द' होता है। गैरो के लिए पानी , चश्मे ए तराना होता है। समय को नहीं अपनों को बदलता देखा है मैंने , घडी के सोईयो को फिर से २४ घंटे मैं वापस आना होता है। जब अपने रूठते है तब एक बात गौर तुम करना , अगर गुस्सा है आँखों मैं , तो  शायद आ भी जायेगा गर मुस्कुरा रहा , तो कभी न आना होता है। कुछ दूर चलिए दोस्त आप मेरे साथ भी , जब दूर जाना होगा तो दुनिया को कुछ बताना होता हे।  करता हु मैं नशा कभी, सही से बात नहीं करता किसी से दूर जाने के लिए , यही बहन होता है। कौन कहता हे मौत के बाद जन्नत , दोसत है दोसत पूरी दुनिया है , जन्नत मैखाना होता है। सुना कहा बिन शराब के नाश नहीं होता , नाश बस निगाहों से ,नजरो को कुछ पिलाना होता है निगाहे न होती तो मैकदा कहा होता, निगाहों से ही तो मजनू दीवाना होता है। जो लग गयी लत किसी को इश्क़ की यारो , तो हर पैमाने के बाद पैमाना होता है...