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Showing posts from May, 2017

उपहास बनाती दुनिया है ....

मेरे हर एक इच्छा को उपहास बनाती दुनिया है । मेरे हर मंजिल को हास्य बनाती दुनिया है । अब एक ही ख्वाइश बची है मेरे ख्वाबो के झोली में , किसीका रंग चढ़ गया है शायद इस बार के होली में...

मेरी बाबू ....

ये मेरी आंखें की पलके क्यों आधी रातो को खुल जाती है । किसको याद करकेे  ये आँसू बहुत बहाती  है । उस लड़की की ही गलती क्यों दुनिया हमे समझाती है । क्यों वो बात नहीं  करती , क्यो मेरे पास न आती है। न मेरा दर्द समझतीं है , न अपना दर्द बताती है । क्यों फिर दिल की बाते अब दिल में रह जाती है । क्यों सारी दुनिया उसको , ही गलत  बताती है । बस गलती इसकी इतना है वो बहुत हस्ती ओर गति है। ओर कोई गलती तो हमको न बिलगाती है । बस इससे ही सब जलते है , और इससे वो जलती है । वो प्यारी पगली सी लड़की बिल्कुल बच्ची जैसी है । वो तब भी बिल्कुल वैसी थी वो अब भी बिल्कुल वैसी है ।। वो बड़ी शान्त सी मेरी दिल मे रहती है । वो सबसे बात करती है बस मुझसे कुछ न कहती है।। वो अपने सारे किस्से दुनिया को खुलके बतलाती है । बस इसीसे दुनिया जलती है, ओर इसीसे वो जलती है । उसके साथ बिताया हर लम्हा याद है मुझको। आज भी हर उसके जख्मो का स्वाद है मुझको ।। वो इतने प्यार से सबको दिल में जगह दे देती है । जो गली देते है पीठ पिछे उसको भी रख लेती है ।। वो जिसको अपना मानती है , ...

अँधेरी रात

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एक दोस्त हमारी खोई हे इन अँधेरी रातो में। न जाने किसकी आ गयी वो भोली बातों में। कुछ पल पीछे जाओगे तो यारी सुहानी चलती थी। क्लास में बस मेरी उसकी कहानी चलती थी। न जाने किसका नज़र  लगा , रिस्तो में ऐसा  जहर लगा।  दुआ किया पर न दुआ  का असर लगा। जल्दी जल्दी , गम ही गम आ गए लगने ततो में। एक दोस्त हमारी खोई हे इन अँधेरी रातो में।  दिल भी करे क्या रह गया एक बेचारा सा। ये तो अब भी समझता हे  अपना उसको पर हालत का मारा सा। देखता हु अब भी उसको बहुत दूरी से। शयद दूर होइ वो मुझसे उसके किसी मज़बूरी से। सब किस्मत की मर्ज़ी हे , कुछ नहीं हमारे हाथो में। एक  दोस्त हमारी खोई हे इन अँधेरी रातो मैं।                                                 

मेरे अन्दर मुझसे ज्यादा .......

भूल जाऊ कैसे , जब याद सदा तुम रहती हो । मेरे अंदर तो मुझसे ज्यादा तुम रहती हो । भूल जाऊ कैसे , जब याद सदा तुम रहती हो । क्या लिख दु तेरे बारे में की ग़ज़ल वो बन जाये । मेरे इन कलमों से ...