मेरी बाबू ....
ये मेरी आंखें की पलके
क्यों आधी रातो को खुल जाती है ।
किसको याद करकेे ये
आँसू बहुत बहाती है ।
उस लड़की की ही गलती
क्यों दुनिया हमे समझाती है ।
क्यों वो बात नहीं करती ,
क्यो मेरे पास न आती है।
न मेरा दर्द समझतीं है ,
न अपना दर्द बताती है ।
क्यों फिर दिल की बाते
अब दिल में रह जाती है ।
क्यों सारी दुनिया उसको ,
ही गलत बताती है ।
बस गलती इसकी इतना है
वो बहुत हस्ती ओर गति है।
ओर कोई गलती तो
हमको न बिलगाती है ।
बस इससे ही सब जलते है ,
और इससे वो जलती है ।
क्यों आधी रातो को खुल जाती है ।
किसको याद करकेे ये
आँसू बहुत बहाती है ।
उस लड़की की ही गलती
क्यों दुनिया हमे समझाती है ।
क्यों वो बात नहीं करती ,
क्यो मेरे पास न आती है।
न मेरा दर्द समझतीं है ,
न अपना दर्द बताती है ।
क्यों फिर दिल की बाते
अब दिल में रह जाती है ।
क्यों सारी दुनिया उसको ,
ही गलत बताती है ।
बस गलती इसकी इतना है
वो बहुत हस्ती ओर गति है।
ओर कोई गलती तो
हमको न बिलगाती है ।
बस इससे ही सब जलते है ,
और इससे वो जलती है ।
वो प्यारी पगली सी लड़की
बिल्कुल बच्ची जैसी है ।
वो तब भी बिल्कुल वैसी थी
वो अब भी बिल्कुल वैसी है ।।
वो बड़ी शान्त सी मेरी
दिल मे रहती है ।
वो सबसे बात करती है
बस मुझसे कुछ न कहती है।।
वो अपने सारे किस्से दुनिया
को खुलके बतलाती है ।
बस इसीसे दुनिया जलती है,
ओर इसीसे वो जलती है ।
बिल्कुल बच्ची जैसी है ।
वो तब भी बिल्कुल वैसी थी
वो अब भी बिल्कुल वैसी है ।।
वो बड़ी शान्त सी मेरी
दिल मे रहती है ।
वो सबसे बात करती है
बस मुझसे कुछ न कहती है।।
वो अपने सारे किस्से दुनिया
को खुलके बतलाती है ।
बस इसीसे दुनिया जलती है,
ओर इसीसे वो जलती है ।
उसके साथ बिताया
हर लम्हा याद है मुझको।
आज भी हर उसके जख्मो
का स्वाद है मुझको ।।
वो इतने प्यार से सबको
दिल में जगह दे देती है ।
जो गली देते है पीठ पिछे
उसको भी रख लेती है ।।
वो जिसको अपना मानती है ,
वही उसको गलत बताते है ।
वो सामने अच्छे बनते है ,
ओर पीछे उसको गलत दिखाते है ।
सुनके सबके जख्मो को ,
वो लड़की अपने दिल को पिघलती है।
बस इसी से दुनिया जलती है
ओर इसी से वो जलती है ।
- दिव्यांश पाठक
हर लम्हा याद है मुझको।
आज भी हर उसके जख्मो
का स्वाद है मुझको ।।
वो इतने प्यार से सबको
दिल में जगह दे देती है ।
जो गली देते है पीठ पिछे
उसको भी रख लेती है ।।
वो जिसको अपना मानती है ,
वही उसको गलत बताते है ।
वो सामने अच्छे बनते है ,
ओर पीछे उसको गलत दिखाते है ।
सुनके सबके जख्मो को ,
वो लड़की अपने दिल को पिघलती है।
बस इसी से दुनिया जलती है
ओर इसी से वो जलती है ।
- दिव्यांश पाठक
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