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Showing posts from October, 2017

कुछ आँसू ....

कुछ आँसू वो थे जो दुनिया को दिखाये नही कुछ आँसू को नकार दिया वो हमको भाये नही कुछ आँसू जान बूझ कर हमने ही छिपाया है कुछ आँसू देख के कुछ ने ताली बजाया है कुछ आँसू को उसकेे खातिर हमने भुला दिया कुछ आँसू आंखों से नही ज़ुबाँ से हमने गा दिया पर कब तक कोषु मैं , तेरी मेरी कहानी को कब तक पीयू खुद के ही आँख के पानी को कब तक  रो रो कर हँसने का जुर्माना दु आखिर मैं कब तक हर एक जख्मो को कैदखाना दु आखिर खुदा ये बतलाओ मर मर के कब तक जियूँगा आखिर कब तक मैं ही हँस हँस के आँसू पियूँगा चलो हम आशिक़ है सबके साथ ही ऐसा होता जो जितना हँसता है पहले आखिर मैं उतना रोता है पर जो मेरी पारो है उसका दुआ तो क़बूल करो हमको काटे दो सारे उसके हिस्से में फूल करो वो पगली जो खुश है,तो उसके पाले में खुशहाली रहने दो मेरी तक़दीर में काली राते है तो काली की काली रहने दो उसके गुल्लक में खुश हाली रहने दो ,मेरी खली की खाली रहने दो

स्कुल क्यों नही आई हो

भोर में मैं बिस्तर छोड़ कर उठ गया मैं नींद से नाता तोड़कर उठ गया उसके बाद तेरी तस्वीर का दीदार किया आखिरकार तेरे आंखों में इजहार किया करता रहा तेरे ख्वाब और उम्मीद के साथ दिल में तेरा ख्याल आंखों में नींद के साथ सोच रहा था आज तुम से क्या बात करुंगा क्लास में कैसे जाहिर जज्बात करूंगा क्लास में कदम रखते ही तुम ऐसा मुझे चौकाई हो जब पता चला तुम स्कूल ही नहीं आई हो अब क्या करूं सारे ख्वाब अरमान जल गए ऐसा झटका मिला कि हम हिल गए पूरे क्लास में तो सब तरफ बच्चों के मेले हैं हम ही थे यार जो तुम बिन अकेले हैं हम सदमा खा खाकर चुपचाप बैठे थे और सारे अध्यापक हमसे  ऐंठे थे स्कूल आने के पहले बहुत पूजा और जाप किया मैंने पर अब लग रहा है कि स्कूल आकर पाप किया मैंने दिल दिमाग सब में तुम ही तुम छाई हो यही सवाल सबसे है कि तुम स्कूल क्यों नहीं आई हो अध्यापक क्लास में आते हैं हम थोड़ा सा घबराते हैं दो-चार ज्ञान देकर वह कुछ पल में चले जाते हैं जब तेरे बेंच पर निगाह जाती है तुम नहीं वहां पर रहती हो लगता है अपना सारा लगता है अपना सारा दर्द अकेले सहती हो सोचता रहता हूं तेरे न आने ...

ग़ज़ल-किसी के पुराने

किसी के पुराने यार हैं हम पर इस वक्त बेकार हैं हम उनको ये खबर है कि हमे कुछ खबर नही पर उनके हर खबर से खबरदार हैं हम मैं तुम्हें भूलना चाहता हूं पर भूल नहीं पाता खुद के दिल से बहुत लाचार है हम जो मोहब्बत को लब से जोड़ती है वही  एहसासों के तार हैं हम बस एक चांद पर हमारा बस नहीं चलता वरना सूर्य के किरणों के सरदार हैं हम बाहर से खिला हुआ पर पांव कीचड़ में  आजकल एक कमल के किरदार है हम