ग़ज़ल-किसी के पुराने

किसी के पुराने यार हैं हम
पर इस वक्त बेकार हैं हम
उनको ये खबर है कि हमे कुछ खबर नही
पर उनके हर खबर से खबरदार हैं हम
मैं तुम्हें भूलना चाहता हूं पर भूल नहीं पाता
खुद के दिल से बहुत लाचार है हम
जो मोहब्बत को लब से जोड़ती है
वही  एहसासों के तार हैं हम
बस एक चांद पर हमारा बस नहीं चलता
वरना सूर्य के किरणों के सरदार हैं हम
बाहर से खिला हुआ पर पांव कीचड़ में 
आजकल एक कमल के किरदार है हम

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