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Showing posts from December, 2017

बहुत रोया.....

बहुत रोया रात भर एक खुद के जज्बात पर वो मुझे गैर कह दी बस इसी पे आंख तर अखिया भी क्या करे वो बहुत मजबूर है आखिरकार कान्हा से उसकी राधा दूर हैं हा पर राधा तो नही समझेगी इस बात को वो क्या जाने उसकी याद में कौन जगता है रात को पर खुदा तुझको तो मेरे बारे में है सब ख़बर बहुत रोया रात भर एक खुद के जज्बात पर वो तो गुम सुम सो रही में यहाँ पर लिख रहा अंधेरा कितना घना है कुछ भी न उससे दिख रहा टप टप आँसू गिर रहे है बादल आँख हो गया साल से जलता रहा हु आधा राख हो गया रोम रोम चिलाता है पर रो नही सकता हु मैं दिखता है कि जिंदा हु पर हो नहीं सकता हु मैं मैं जिंदा हो जाऊं ए जान ऐसा कुछ तो कर बहुत रोया रात भर एक जज़्बात पर

Gazal- कही कही

दिखते हैं उजालों में जुगनू कहीं-कहीं मैं खुद हूं पर खुद में हूं कहीं कहीं रहने को तो हर पल दिल में रहती है पर होती है उससे गुफ़्तगू कहीं कहीं इश्क में गया हूं तो कंजूस हो गया मैं बचाता रहता हूं अपना आंसू कहीं कहीं

क्यों नही आती हो

की क्यों नही आती पास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये कि जबसे तुम गयी ज़िन्दगी भी गयी जिससे था मन रोशन वो चाँदनी भी गयी होठो पर मेरे बस एक कमाई थी पर तुम गयी तो हँसी भी गयी जुदा हो कर किसकी हुई खास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये जब भी तुम रूठती हो खुद से रूठ जाता हूं मैं घुटता रहता हूं खुद में खुद को सुलगाता हु मैं यही दौलत मिली मुझको तुमसे दूर हो कर कि अब मौन होकर चिलाता हु मैं यू क्यों मुझे की उदास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये क्यों नही आती हो पास अब तुम पिये

तुमने क्या बना दिया ....

क्या था मैं अब तक तुमने अब क्या बना दिया पत्थर को कब आया था पर तुमने उसको रुला दिया जब तुम थे साथ मेरे कापियां सूनी पड़ी थी पर आंखों में खुशियां एक तरफ दूनी पड़ी थीं तेरे साथ रोए भी थे पर तुमने हंसना सिखाया जिंदगी का लुफ्त क्या है तुमने हमको बतायां पर तुमने तब हंसा के अब हमको सता दिया क्या था मैं तब तक तुमने अब क्या बना दिया मैं नहीं पेंसिल था तुमने तो हम को गड़ा तुमने जब हमको गड़ा तो मैंने खुद को पढ़ा किताबे गीत ग़ज़ल की अब मैं पढ़ने लगा तोड़ा सा गढ़ दिया था तुमने फिर मैं ही खुद को गढ़ने लगा ज़िन्दगी का एक मक़सद तुमने हमको दिखा दिया क्या था मैं अब तक तुमने अब क्या बना दिया

मैं कैसा हु ....

कभी रहो  पर जब तुमको कोई हमसा मिल जाएगा उसका हाल भी जब मेरे जैसे एक दम सा मिल जाएगा जब तुम चौक जाओगे वह तुम ही हो कोई और नहीं जब अपने अस्तित्व पर कर पाओगे तुम गौर नहीं जब कोई एक पगली लड़की तेरे रूह में बस जाएगी जब वही प्यास लगाएगी जब वही प्यास बुझ जाएगी जब उसकी खुशी तेरी होगी जब उसके गम तेरे होंगे जब रात सो नहीं पाओगे जब आंख नम तेरे होंगें जब अपना दिल किसी पगली के आंखों में खो आओगे तब जानोगे मैं कैसा हूं जब मुझ जैसे हो जाओगे जब लचारी होगी रोने में जब याद उस का आएगा सोने में जब महफ़िल तुम्हें कटेगी सुकून मिलेगा कोने में जब मेज पर रखी रखी रोटी सुख जाएगी जब मां तुमको डाँटेगी जब माँ रूठ जाएगी जब वो जुझलाहट में बोलेंगी तेरा ध्यान कहा पे रहता है पढ़ने में भी तुम्हारा मन नही लगता तो तू परेशान कहा पे रहता है और तुम खुद को खो दोगे अपने अंदर भी उसको पाओगे तब जानोगे मैंं कैसा हु जब तुम मेरे जैसे हो जाओगे जब सामने से वो गुज़रेगी तुम सब कुछ बोल नही पाओगे मैन में पड़ जायेगा एक बंधन और वो खोल नही पाओगे पर बात कुछ न हो पाएगी चली जायेगी वो चुपके से जब दिल की ...

प्यार तुमसे हो गया

यार हम क्या बताये कब प्यार तुमसे हो गया मेरे अहसासों का व्यापार तुमसे हो गया ये हादसा है तभी का जब तुम फैज़ाबाद थी मेरे सांसो में हर घड़ी हर पल तुम आबाद थी वो रात भर बात करना , तुम्हे सुबह जल्दी उठाना वो मेरी आवारगी से तेरा हर दिन रूठ जाना तेरे गुस्से के डर से जब हार तुमसे हो गया यार हम क्या बताये कब प्यार तुमसे हो गया जब वो नगर छोड़ आयी तुम इस शहर में मिलने स्कूल में आई दोपहर में देख के जब तुमको मैं हल्का सा मुस्कुरा रहा था तुम बुला रही थी में जाने में शर्मा रहा था बस वही मीठा सा तकरार तुमसे हो गया यार हम क्या बताये कब प्यार तुमसे हो गया एक लम्हा आया आखिर , जब हंसी जाने लगा तुझको खो देने का डर हमको सताने लगा इसी डर में मैं इज़हार कर दिया मगर मोहब्बत ने दोस्ती को बेकार कर दिया बस यही गिला है कि इज़हार तुमसे हो गया यार हम क्या बताये कब प्यार तुमसे हो गया कई बार फसाद हुआ न कितना विवाद हुआ दोस्ती,यारी ओ मोहब्बत हर रिश्ता बर्बाद हुआ कुछ लोग आये पास में तेरे दिल में जगह लेने लगे मुझसे ज्यादा प्यार सायद वो तुम्हे देने लगे जो भी न होना था वो भी यार तुमसे हो गया य...

कलम का दर्द

कोरे कागज को लेकर दिल को सुनता हुआ मेरा कलम चल पड़ा शब्दों को बुनता हुआ यह दर्द का फसाद है मन और शब्द में विवाद है मेरी कमाई बस यही अपना हाल मुझको याद है अपने जख्म को लिखा इन पन्नो पे हर बार मैं खुद की गीत खुद का ग़ज़ल किया खुद को ही इज़हार मैं आज सोचता हूं कलम को मैं एक उपहार हु इसके ही स्यायी से इसके  जख्मो को उतार दु दिन भर बेयस्त रहता हूं मैं दुनिया पर के काम में मुलाकात होती है इससे बस थोड़ी सी शाम में मैं जब रहता हूं बेयस्त तो तन्हाई सहता है ये पर जब भी तन्हा मैं हुआ मेरे साथ ही रहता है ये दिमाक ये कहता है कि अपने हाल की बात करू फिर अपने दर्द से रात भर मुलाकात करू पर दिल की ये आवाज़ है हर बात को नकार दु आज सोचता हूं कलम को मैं एक उपहार हु इसके ही स्यायी से इसके  जख्मो को उतार दु

प्यार बाकी रह गया

मेरे हिस्से मैं सनम तेरा प्यार बाकी रह गया जो मैंने चाहा वही हर बार बाकी रह गया मैन उसके सिवा कुछ भी तो मंगा नही बस उसे तू ढूंढ दे जो खोया है कहि उसके रूह के सदा आस पास रहता हूं मैं फिर भी ए खुदा क्यों उदास रहता हूं मैं आखिर कैसे है वो क्या हुआ मेरी जान को कुछ खबर मिलती इस बेबस इंसान को जो भी रिश्ता उससे था वो टूट के बिखर गया दिन भी ढलने लगा मैं भी अपने घर गया अब ऐतबार के जगह दीवार बाकी रह गया मेरे हिस्से में सनम तेरा प्यार बाकी रह गया

बस यु ही

तेरा चेहरा है वही पर मिज़ाज़ में बदलाव है मैं धूप में जल रहा हु पर तुझको क्या लगाव है मेरा दर्द ज़रा ज़रा गीत में ढलता गया में खुद को तलासते किस राह पे चलता गया जो रूह के थे हिस्से कल वो अनजाने कैसे हुए दिल भी ये कह टाल देता न जाने कैसे हुए दुनिया का था ये नियम बदलने वाले बदल गए हम कहाँ तक रोकते वो जाने वाले थे चल गए

ग़ज़ल- पाया है

हर इश्क़ करने वाला इल्ज़ाम पाया है यहाँ कोई बदनाम हो कर भी नाम पाया है कौन कह रहा था उसने दर्द दिया हमको हमने तो ये दोस्ती का इनाम पाया है आज भी वो दूर होकर दूर नही मुझसे मैंने उस...

तुम नजर

तुम नजर फ़ेर के चली गयी में तुमको देखता ही रहा तेरे हुस्न के चका चोन्द में आँख सेकता ही रहा तुम अपने घर को चली गयी में अपने सफर को चला गया तेरे यादो के खुशबू के संग जाने किधर को चला गया कई शाम थके कदमों से तेरी खोज मैं करता रहा हर दिन हर रात यही काम हर रोज़ मैं करता रहा एक शाम तू मिल गयी अपने घर के बाम पर मेरा होंठ फिर से ठहर गया तेरे ही नाम पर फिर अपने सुखी आँखों से अश्क़ फेकता ही रहा फिर तुम नज़र फेर के चली गयी मैं तुमको देखता ही रहा

ऐ कलम

ए कलम तू बता तू क्यों मेरी यार है तुझे तो मालूम है कि किससे मुझको प्यार है उसके सिवा तो मेरे लिए सब कुछ दर किनार है जिसे सब कुछ समझा उसी मुझपे नही ऐतबार है ये दिव तो आज कल सबके लि...

ग़ज़ल - पहचान मेरा

हर मोहतरम से है पहचान मेरा फिर भी खतरे में ,होना इंसान मेरा जिंदा हु फिर भी ये खोज जारी है आखिर है कहा पर है जान मेरा में उसके दरबार में उसी की रुस्वाई कर आया वो चिलाता रहा "ये है ...

मैं तो मरा

मैं तो मरा हज़ारो बार हु आज भी मारने को तैयार हूं हथियार का न उपयोग करो मैं खुद ही में हथियार हु मुझपे गोली न बेकार करो बस थोड़ा इन्तज़ार करो मैं क्या तुम भी मर जाओगे बे-पन्हा किसी से प्यार करो इसी प्यार के खातिर मैं इतना बीमार हु मैं तो मरा हज़ारो बार हु आज भी मारने को तैयार हूं आंखों में पानी है तेरी भी यही कहानी है जिसका तू दीवाना है वो किसी औऱ कि रानी है और उसी का उपहार है कि आज कलमकार हु में मरा हज़ारो बार हु आज भी मारने को तैयार हूं

में दीवाना

तेरे ज़िन्दगी में दिया जले मैं बस उसका राख राहु तू चमके रोशन चांदनी सी मैं ख़ाक हूं तो खाक राहु तेरा रोसन हो जाना हमको भी रोशन कर देगा तेरा हंसता हुआ चेहरा मुझमें में भी मोती भर देगा उस हार में मेरी हार नहीं जिसमें भी जीत तुम्हारा हो वह दीवाना ,दीवाना क्या जो दिल के हाथों न हारा हो

मैं  कहा ह

मैं  कहा हु तुम कहा हो खुश रहो बस तुम जहा हो मेरे हिस्से में कटे दे दो उसके हिस्से से कटे ले लो हमको दो खर पतवार सारे तुम्हे अदा हो सभी सितारे तेरा महलों सा आशिया हो खुश रहो बस त...

कुछ अश्क़।

कुछ आँसू वो थे जो दुनिया को दिखाये नही कुछ आँसू को नकार दिया वो हमको भाये नही कुछ आँसू जान बूझ कर हमने ही छिपाया है कुछ आँसू देख के कुछ ने ताली बजाया है कुछ आँसू को उसकेे खातिर हमने भुला दिया कुछ आँसू आंखों से नही ज़ुबाँ से हमने गा दिया पर कब तक कोषु मैं , तेरी मेरी कहानी को कब तक पीयू खुद के ही आँख के पानी को कब तक  रो रो कर हँसने का जुर्माना दु आखिर मैं कब तक हर एक जख्मो को कैदखाना दु आखिर खुदा ये बतलाओ मर मर के कब तक जियूँगा आखिर कब तक मैं ही हँस हँस के आँसू पियूँगा चलो हम आशिक़ है सबके साथ ही ऐसा होता है जो जितना हँसता है पहले आखिर मैं उतना रोता है पर जो मेरी पारो है उसका दुआ तो क़बूल करो हमको काटे दो सारे उसके हिस्से में फूल करो वो पगली जो खुश है,तो उसके पाले में खुशहाली रहने दो मेरी तक़दीर में काली राते है तो काली की काली रहने दो उसके गुल्लक में खुश हाली रहने दो , मेरी खली की खाली रहने दो

रात में थी,आँखे पानी

रात में थी,आँखे पानी में बताओ क्या क्या झेले इस ज़िंदगानी  में दिल में तू है , तेरी यादों का मेला है फिर भी मन है कि एकदम अकेला है दिल में कोलाहल, कोहराम बहुत है बाहर आराम इतना लिखा बस रात की कहानी में बताओ क्या क्या झेले इस ज़िंदगानी  में लब सिला हो आँख चिलाये तब बताओ कैसे कोई चुप कराए तब जो थी चुप कराने वाली उसका पता ही नही वो कहती है मेरा उससे वास्ता ही नही बस यही सुन लो मेरी जुबानी में बताओ क्या क्या झेले इस ज़िंदगानी  में

छोड़ कर अब मुझे

यू क्यो गयी प्रिये छोड़ कर अब मुझे फीकी लगती है खुशिया तुम बिन सब मुझे दर्द के गाने गाता हु अब हस्ता नहीं बस हँसता हु अब जबसे दूर तू है गयी खुद से दूरिया बढ़ाता हु अब दूर जाने का बता दो सबब मुझे यू क्यो गयी प्रिये छोड़ कर अब मुझे क्यों तुझे मेरा ख्याल आता नही क्या तेरा दिल मुझको बुलाता नही गयी तू जबसे हस्ता हँसता हु मैं पर ये तमाशा तुझ बिन मुझे भाता नही मन से अति है हँसी कब, मुझे यू क्यो गयी प्रिये छोड़ कर अब मुझे

Gazal- सीख लो

जिंदा रहना है तो यह बहाना सीख लो दर्द कितना भी हो मुस्कुराना सीख लो रिश्ता कोई भी हो पर खैर चाहते हो अगर खुद थोड़ा झुक जाओ उनको मनाना सीख लो आएगी सारी दौलत तुम्हारे कदमों पर ...

Gazal...........

किसी के पुराने  किसी के पुराने रिस्तेदार 

ग़ज़ल

खुदा मैंने कब कहाँ की बलवान बना जो इंसान हु तो पहले इंसान बना सारी महफ़िल को पता है उनका पता क्या है एक मैं ही फ़िर रहा हु अनजान बना

Gazal- हर पल

हर पल हर लम्हा खुद को मारा करते है जब हम तुमको याद दोबारा करते है हम आशिक़ है हमे जीने की फुरसत कहाँ बस मौत के इंतज़ार में दिन गुज़रा करते है मुझे दरिया बनाओ की सब की प्यास मिटे समंदर तो बस पानी को खारा करते है हमे तो होश नही पर तुम्हे क्या लगता है क्या हम अब भी फिक्र तुम्हारा करते है

आँखे

तुम नही थी तो बहुत चिलाती थी आँखे बिन बातो की बातों पे भी रुलाती थी आँखे तुम लगी रही लब की बात सुनने में लेकिन तुमको चीख पुकार के बुलाती थी आँखे तुम क्या जानो , इन आँखों ने क्या ...

Gazal

आँखों में बसा लो हमको,हम भी देखे तेरा दीवाना कैसा दिखता है वो पागल जो खुद से है अनजाना कभी पास में आओ, कुछ अपना दर्द बताव पर सो नही पायेगा वो उसके ख्वाबो में न आना तुम चुपके से हो आती फिर गुम हो जाती जैसे सताई हो उसको , किसी को न सताना वो था एक नटखट प्यारा बच्चा, पर हो चुका है कच्चा तुमको तो सब मालुम है अब तुमको क्या बताना

Gazal- अभी खामोश रहो

अभी खामोश रहो मेरी उड़ान बाकी है ये सब हवाएं है अभी आसमान बाकी है कल उस गली में कोई भूखा नही सोया लगता है वहाँ कोई इंसान बाकी है माना आधी रात हो गया पर में सो जाऊ कैसे मेरी थकी निग़ाह में अरमान बाकि है तब तक तुझसे चाहत का रिश्ता रहेगा मेरा जब तक इस लाश में थोड़ा सा जान बाकी है वो कहते है मुझे देख के मौन हो जाओ ये कैसे मुमकिन हो मेरे मुंह मे जुबान बाकी है

Gazal

हर पल हर लम्हा खुद को मारा करते है जब तुमको याद दोबारा करते है हम आशिक़ है हमे जीने की फुरसत कहाँ बस मौत के इंतज़ार में दिन गुज़रा करते है मुझे दरिया बनाओ की सब की प्यास मिटे समंदर तो बस पानी को खारा करते है हमे तो होश नही पर तुम्हे क्या लगता है क्या हम अब भी फिक्र तुम्हारा करते है - दिव्यांश पाठक