की क्यों नही आती पास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये कि जबसे तुम गयी ज़िन्दगी भी गयी जिससे था मन रोशन वो चाँदनी भी गयी होठो पर मेरे बस एक कमाई थी पर तुम गयी तो हँसी भी गयी जुदा हो कर किसकी हुई खास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये जब भी तुम रूठती हो खुद से रूठ जाता हूं मैं घुटता रहता हूं खुद में खुद को सुलगाता हु मैं यही दौलत मिली मुझको तुमसे दूर हो कर कि अब मौन होकर चिलाता हु मैं यू क्यों मुझे की उदास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये क्यों नही आती हो पास अब तुम पिये
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