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जिसके केवल आँसू कीमत.....

जिसकी केवल आँसू कीमत खरीद कर वह प्रीत किया है तुम्हें दी सबने मोती माला मैंने तुमको गीत किया है कोई बादल इतना पागल,तुमको सराबोर कर गया चुना किसी ने रुन-झुन बाली,कोई चाँद से मांग भर गया कोई गले में हार बाध कर,तुमको खुदसे बांध लिया है किसी के होठ थे इतने पावन,माथे पर वह तिलक धर गया हार गया इन सब में मैं पर, तेरे खातिर जीत किया है तुम्हे दी सबने माला मोती मैंने तुमको गीत किया है तेरी हसी-ठिठोली गुजी,मेरे हर एक धुन में बज कर गाया जैसे,कली जग गयी,देख रही मुझको अचरज कर क्या सितारे तारे दूँ मैं,तुम जब खुद ही आभूषण हो देखो कैसे इठलाता हैं ,अक्षर अक्षर तुमसे सज कर सबने तुमको बाधा तुममे  मैंने रीत-विपरीत किया है तुम्हें दी सबने मोती-माला मैंने तुमको गीत किया है हवा को अंगड़ाई आयी,लहर फहर कर के बल खाया चिड़िया को भी चहक मिल गयी,तुमको गीतों में जो गाया काजल,मेहँदी,कंगन,बाली आज है, कल ढल जाएंगे गीत वहीं है सदा सुहागन पीड़ा संग जो मांग भराया उन गीतों के भीतर मैंने  तुमको व्यतीत किया है तुम्हें दी सबने मोती माला मैंने तुमको गीत किया है जिसकी केवल आँसू कीमत,खरीद कर वह प्रीत किया है.. -दिव्यांश प...

Gazal

तुम बदलती रही अदा अपना मैं निभाता रहा वफ़ा अपना गुमा ये है सारा जमाना अपना है हिकीक़त ये है कोई नही रहा अपना तोड़ दो बाप,भाईयो से रिश्ता सब तुम्ही उठा लेने खुद जनाज़ा अपना माना अ...

बहुत रोया.....

बहुत रोया रात भर एक खुद के जज्बात पर वो मुझे गैर कह दी बस इसी पे आंख तर अखिया भी क्या करे वो बहुत मजबूर है आखिरकार कान्हा से उसकी राधा दूर हैं हा पर राधा तो नही समझेगी इस बात को वो क्या जाने उसकी याद में कौन जगता है रात को पर खुदा तुझको तो मेरे बारे में है सब ख़बर बहुत रोया रात भर एक खुद के जज्बात पर वो तो गुम सुम सो रही में यहाँ पर लिख रहा अंधेरा कितना घना है कुछ भी न उससे दिख रहा टप टप आँसू गिर रहे है बादल आँख हो गया साल से जलता रहा हु आधा राख हो गया रोम रोम चिलाता है पर रो नही सकता हु मैं दिखता है कि जिंदा हु पर हो नहीं सकता हु मैं मैं जिंदा हो जाऊं ए जान ऐसा कुछ तो कर बहुत रोया रात भर एक जज़्बात पर

Gazal- कही कही

दिखते हैं उजालों में जुगनू कहीं-कहीं मैं खुद हूं पर खुद में हूं कहीं कहीं रहने को तो हर पल दिल में रहती है पर होती है उससे गुफ़्तगू कहीं कहीं इश्क में गया हूं तो कंजूस हो गया मैं बचाता रहता हूं अपना आंसू कहीं कहीं

क्यों नही आती हो

की क्यों नही आती पास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये कि जबसे तुम गयी ज़िन्दगी भी गयी जिससे था मन रोशन वो चाँदनी भी गयी होठो पर मेरे बस एक कमाई थी पर तुम गयी तो हँसी भी गयी जुदा हो कर किसकी हुई खास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये जब भी तुम रूठती हो खुद से रूठ जाता हूं मैं घुटता रहता हूं खुद में खुद को सुलगाता हु मैं यही दौलत मिली मुझको तुमसे दूर हो कर कि अब मौन होकर चिलाता हु मैं यू क्यों मुझे की उदास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये क्यों नही आती हो पास अब तुम पिये

तुमने क्या बना दिया ....

क्या था मैं अब तक तुमने अब क्या बना दिया पत्थर को कब आया था पर तुमने उसको रुला दिया जब तुम थे साथ मेरे कापियां सूनी पड़ी थी पर आंखों में खुशियां एक तरफ दूनी पड़ी थीं तेरे साथ रोए भी थे पर तुमने हंसना सिखाया जिंदगी का लुफ्त क्या है तुमने हमको बतायां पर तुमने तब हंसा के अब हमको सता दिया क्या था मैं तब तक तुमने अब क्या बना दिया मैं नहीं पेंसिल था तुमने तो हम को गड़ा तुमने जब हमको गड़ा तो मैंने खुद को पढ़ा किताबे गीत ग़ज़ल की अब मैं पढ़ने लगा तोड़ा सा गढ़ दिया था तुमने फिर मैं ही खुद को गढ़ने लगा ज़िन्दगी का एक मक़सद तुमने हमको दिखा दिया क्या था मैं अब तक तुमने अब क्या बना दिया

मैं कैसा हु ....

कभी रहो  पर जब तुमको कोई हमसा मिल जाएगा उसका हाल भी जब मेरे जैसे एक दम सा मिल जाएगा जब तुम चौक जाओगे वह तुम ही हो कोई और नहीं जब अपने अस्तित्व पर कर पाओगे तुम गौर नहीं जब कोई एक पगली लड़की तेरे रूह में बस जाएगी जब वही प्यास लगाएगी जब वही प्यास बुझ जाएगी जब उसकी खुशी तेरी होगी जब उसके गम तेरे होंगे जब रात सो नहीं पाओगे जब आंख नम तेरे होंगें जब अपना दिल किसी पगली के आंखों में खो आओगे तब जानोगे मैं कैसा हूं जब मुझ जैसे हो जाओगे जब लचारी होगी रोने में जब याद उस का आएगा सोने में जब महफ़िल तुम्हें कटेगी सुकून मिलेगा कोने में जब मेज पर रखी रखी रोटी सुख जाएगी जब मां तुमको डाँटेगी जब माँ रूठ जाएगी जब वो जुझलाहट में बोलेंगी तेरा ध्यान कहा पे रहता है पढ़ने में भी तुम्हारा मन नही लगता तो तू परेशान कहा पे रहता है और तुम खुद को खो दोगे अपने अंदर भी उसको पाओगे तब जानोगे मैंं कैसा हु जब तुम मेरे जैसे हो जाओगे जब सामने से वो गुज़रेगी तुम सब कुछ बोल नही पाओगे मैन में पड़ जायेगा एक बंधन और वो खोल नही पाओगे पर बात कुछ न हो पाएगी चली जायेगी वो चुपके से जब दिल की ...