मैं कैसा हु ....
कभी रहो पर जब तुमको
कोई हमसा मिल जाएगा
उसका हाल भी जब मेरे जैसे
एक दम सा मिल जाएगा
जब तुम चौक जाओगे
वह तुम ही हो कोई और नहीं
जब अपने अस्तित्व पर
कर पाओगे तुम गौर नहीं
जब कोई एक पगली लड़की
तेरे रूह में बस जाएगी
जब वही प्यास लगाएगी
जब वही प्यास बुझ जाएगी
जब उसकी खुशी तेरी होगी
जब उसके गम तेरे होंगे
जब रात सो नहीं पाओगे
जब आंख नम तेरे होंगें
कोई हमसा मिल जाएगा
उसका हाल भी जब मेरे जैसे
एक दम सा मिल जाएगा
जब तुम चौक जाओगे
वह तुम ही हो कोई और नहीं
जब अपने अस्तित्व पर
कर पाओगे तुम गौर नहीं
जब कोई एक पगली लड़की
तेरे रूह में बस जाएगी
जब वही प्यास लगाएगी
जब वही प्यास बुझ जाएगी
जब उसकी खुशी तेरी होगी
जब उसके गम तेरे होंगे
जब रात सो नहीं पाओगे
जब आंख नम तेरे होंगें
जब अपना दिल किसी पगली के आंखों में खो आओगे तब जानोगे मैं कैसा हूं जब मुझ जैसे हो जाओगे
जब लचारी होगी रोने में
जब याद उस का आएगा सोने में
जब महफ़िल तुम्हें कटेगी
सुकून मिलेगा कोने में
जब मेज पर रखी रखी
रोटी सुख जाएगी
जब मां तुमको डाँटेगी
जब माँ रूठ जाएगी
जब वो जुझलाहट में बोलेंगी
तेरा ध्यान कहा पे रहता है
पढ़ने में भी तुम्हारा मन नही लगता
तो तू परेशान कहा पे रहता है
जब याद उस का आएगा सोने में
जब महफ़िल तुम्हें कटेगी
सुकून मिलेगा कोने में
जब मेज पर रखी रखी
रोटी सुख जाएगी
जब मां तुमको डाँटेगी
जब माँ रूठ जाएगी
जब वो जुझलाहट में बोलेंगी
तेरा ध्यान कहा पे रहता है
पढ़ने में भी तुम्हारा मन नही लगता
तो तू परेशान कहा पे रहता है
और तुम खुद को खो दोगे अपने अंदर भी उसको पाओगे
तब जानोगे मैंं कैसा हु जब तुम मेरे जैसे हो जाओगे
तब जानोगे मैंं कैसा हु जब तुम मेरे जैसे हो जाओगे
जब सामने से वो गुज़रेगी
तुम सब कुछ बोल नही पाओगे
मैन में पड़ जायेगा एक बंधन
और वो खोल नही पाओगे
पर बात कुछ न हो पाएगी
चली जायेगी वो चुपके से
जब दिल की बाते दिल मे
राह जाएंगी दुबके से
जब रात भर सोचोगे
काश कुछ कह दिया होता
दीदार के हुस्न तो कर लिया
लफ़्ज़ों का जाम भी पिया होता
पागलो जैसी हर एक शाम
तेरी हालत होगी
तुम भूल जाओगे खुद को ही
खुद पे लालत होगी
तुम सब कुछ बोल नही पाओगे
मैन में पड़ जायेगा एक बंधन
और वो खोल नही पाओगे
पर बात कुछ न हो पाएगी
चली जायेगी वो चुपके से
जब दिल की बाते दिल मे
राह जाएंगी दुबके से
जब रात भर सोचोगे
काश कुछ कह दिया होता
दीदार के हुस्न तो कर लिया
लफ़्ज़ों का जाम भी पिया होता
पागलो जैसी हर एक शाम
तेरी हालत होगी
तुम भूल जाओगे खुद को ही
खुद पे लालत होगी
जब आँखों से तुम रोओगे होठो से मुस्कुराओगे
तब जानोगे में कैसा हु जब मुझ जैसे हो जाओगे
तब जानोगे में कैसा हु जब मुझ जैसे हो जाओगे
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