Mout apna hai
सोच रहा हु मौत आजमाने को , जा रहा प्यार बढ़ाने को। सुना हे दुसमन भी आते हे , अपने बनकर दुःख जताने को जा रहा मौत आजमाने को। क्या हे ज़िन्दगी मैं , थोड़ा गम ,थोड़ी ख़ुशी। क्या बताये ज़िन्दगी इस दीवाने को, जो तड़प रहा मौत आजमाने को। मोहब्त देखि , दौलत देखि , सोहरत देखि तड़प रहे अपने दूर जाने को। तब कह रही मौत पास आने को। कितनी दिल दार हे मौत। छोड़ दिया सबने तब वो बुला रही है, तन्हाई मैं अपना आशिक़ बना रही है। अगर होती हमारी किस्मत , विशाल-ऐ-यार को। तो कहा देखती ज़िन्दगी इंतज़ार को। कौन जाता फिर ज़िन्दगी छोड़ , मौत के बाजार को। जी रहा हु मौत के इंतज़ार को। मौत कितना प्यारा हे , देखना होगा। जो होता होगा फिर से जनम , तो फिर यही धुप सेकना होगा। जा रहा हु बदलो के सैर को , छोड़ के धरती पे अपने , गैर को। देखना चाहता हु , दूर से ज़माने को। जा रहा हु , मौत आजमाने को। विशाल-ऐ -यार --- यार से मिलन