Tadap

रोता रहता अंदर हज़ारो मैं,
 कैसे दिखाऊ तन्हाई बाज़ारो मैं।
तड़प  तड़प के शायरी लिख देता हु ,
अब नहीं आते अंशू अन्हारो मैं।

एक दिन सवाल किया रब से ,
रब ने कहा ,
कई पड़े ऐसे फिसूल प्यारो मैं मैं।

तड़प तड़प के मैं इज़हार करता ,
हा मैं यार को थोड़ा-थोड़ा प्यार करता।

 क्यों मेरे आँखों मैं गुलाब जल मिलता है ,
सयाद उनके दिल मैं किसी और के लिए कमल खिलता है।

पुराने सब रास्ते वो भुला दी है ,
नए रास्तो पे चल  के वो मुस्कुरा दी है।

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