जिसके केवल आँसू कीमत.....
जिसकी केवल आँसू कीमत
खरीद कर वह प्रीत किया है
तुम्हें दी सबने मोती माला
मैंने तुमको गीत किया है
कोई बादल इतना पागल,तुमको सराबोर कर गया
चुना किसी ने रुन-झुन बाली,कोई चाँद से मांग भर गया
कोई गले में हार बाध कर,तुमको खुदसे बांध लिया है
किसी के होठ थे इतने पावन,माथे पर वह तिलक धर गया
हार गया इन सब में मैं पर,
तेरे खातिर जीत किया है
तुम्हे दी सबने माला मोती
मैंने तुमको गीत किया है
तेरी हसी-ठिठोली गुजी,मेरे हर एक धुन में बज कर
गाया जैसे,कली जग गयी,देख रही मुझको अचरज कर
क्या सितारे तारे दूँ मैं,तुम जब खुद ही आभूषण हो
देखो कैसे इठलाता हैं ,अक्षर अक्षर तुमसे सज कर
सबने तुमको बाधा तुममे
मैंने रीत-विपरीत किया है
तुम्हें दी सबने मोती-माला
मैंने तुमको गीत किया है
हवा को अंगड़ाई आयी,लहर फहर कर के बल खाया
चिड़िया को भी चहक मिल गयी,तुमको गीतों में जो गाया
काजल,मेहँदी,कंगन,बाली आज है, कल ढल जाएंगे
गीत वहीं है सदा सुहागन पीड़ा संग जो मांग भराया
उन गीतों के भीतर मैंने
तुमको व्यतीत किया है
तुम्हें दी सबने मोती माला
मैंने तुमको गीत किया है
जिसकी केवल आँसू कीमत,खरीद कर वह प्रीत किया है..
-दिव्यांश पाठक
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