Gazal- कही कही
दिखते हैं उजालों में जुगनू कहीं-कहीं
मैं खुद हूं पर खुद में हूं कहीं कहीं रहने
मैं खुद हूं पर खुद में हूं कहीं कहीं रहने
को तो हर पल दिल में रहती है
पर होती है उससे गुफ़्तगू कहीं कहीं
पर होती है उससे गुफ़्तगू कहीं कहीं
इश्क में गया हूं तो कंजूस हो गया मैं
बचाता रहता हूं अपना आंसू कहीं कहीं
बचाता रहता हूं अपना आंसू कहीं कहीं
Comments
Post a Comment