Gazal

तुम बदलती रही अदा अपना
मैं निभाता रहा वफ़ा अपना

गुमा ये है सारा जमाना अपना है
हिकीक़त ये है कोई नही रहा अपना

तोड़ दो बाप,भाईयो से रिश्ता सब
तुम्ही उठा लेने खुद जनाज़ा अपना

माना अब हमारे बीच फासला है बहुत
फिर हाल मुझे भी बता अपना

कोई गिला नहीं अंग्रेजी नहीं आती है
मुझे फक्र है! मैं भुला नहीं ज़ुबाँ अपना

एक मजहब हो जहाँ सब अपने हो
न कोई धर्म अपना, न कोई खुदा अपना

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