Gazal

हर पल हर लम्हा खुद को मारा करते है
जब तुमको याद दोबारा करते है
हम आशिक़ है हमे जीने की फुरसत कहाँ
बस मौत के इंतज़ार में दिन गुज़रा करते है
मुझे दरिया बनाओ की सब की प्यास मिटे
समंदर तो बस पानी को खारा करते है
हमे तो होश नही पर तुम्हे क्या लगता है
क्या हम अब भी फिक्र तुम्हारा करते है
- दिव्यांश पाठक

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