की क्यों नही आती पास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये कि जबसे तुम गयी ज़िन्दगी भी गयी जिससे था मन रोशन वो चाँदनी भी गयी होठो पर मेरे बस एक कमाई थी पर तुम गयी तो हँसी भी गयी जुदा हो कर किसकी हुई खास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये जब भी तुम रूठती हो खुद से रूठ जाता हूं मैं घुटता रहता हूं खुद में खुद को सुलगाता हु मैं यही दौलत मिली मुझको तुमसे दूर हो कर कि अब मौन होकर चिलाता हु मैं यू क्यों मुझे की उदास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये क्यों नही आती हो पास अब तुम पिये
टायर के दुकान से लेके चाय के दुकान तक कई छोटू मिलते है सेठ के मकान तक । दिन में काम करते है रात सड़क पर सोते है , हमारे देश मे बच्चे भगवान का रूप होते है । कभी यह गली खाते है , कभी वहा...
चलो छोड़ कर जाना था .... पर ऐसे तो न जाना था जाने की वजह जाने से पहले उसको तो बताना था वो अब किससे रोयेगी वो अब किससे गायेगी रातो में जो सपने देखे वो भोर में किसे बताएगी जो वादा तुमन...
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