की क्यों नही आती पास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये कि जबसे तुम गयी ज़िन्दगी भी गयी जिससे था मन रोशन वो चाँदनी भी गयी होठो पर मेरे बस एक कमाई थी पर तुम गयी तो हँसी भी गयी जुदा हो कर किसकी हुई खास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये जब भी तुम रूठती हो खुद से रूठ जाता हूं मैं घुटता रहता हूं खुद में खुद को सुलगाता हु मैं यही दौलत मिली मुझको तुमसे दूर हो कर कि अब मौन होकर चिलाता हु मैं यू क्यों मुझे की उदास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये क्यों नही आती हो पास अब तुम पिये
क्या था मैं अब तक तुमने अब क्या बना दिया पत्थर को कब आया था पर तुमने उसको रुला दिया जब तुम थे साथ मेरे कापियां सूनी पड़ी थी पर आंखों में खुशियां एक तरफ दूनी पड़ी थीं तेरे साथ रोए भी थे पर तुमने हंसना सिखाया जिंदगी का लुफ्त क्या है तुमने हमको बतायां पर तुमने तब हंसा के अब हमको सता दिया क्या था मैं तब तक तुमने अब क्या बना दिया मैं नहीं पेंसिल था तुमने तो हम को गड़ा तुमने जब हमको गड़ा तो मैंने खुद को पढ़ा किताबे गीत ग़ज़ल की अब मैं पढ़ने लगा तोड़ा सा गढ़ दिया था तुमने फिर मैं ही खुद को गढ़ने लगा ज़िन्दगी का एक मक़सद तुमने हमको दिखा दिया क्या था मैं अब तक तुमने अब क्या बना दिया
मैं तो मरा हज़ारो बार हु आज भी मारने को तैयार हूं हथियार का न उपयोग करो मैं खुद ही में हथियार हु मुझपे गोली न बेकार करो बस थोड़ा इन्तज़ार करो मैं क्या तुम भी मर जाओगे बे-पन्हा किसी से प्यार करो इसी प्यार के खातिर मैं इतना बीमार हु मैं तो मरा हज़ारो बार हु आज भी मारने को तैयार हूं आंखों में पानी है तेरी भी यही कहानी है जिसका तू दीवाना है वो किसी औऱ कि रानी है और उसी का उपहार है कि आज कलमकार हु में मरा हज़ारो बार हु आज भी मारने को तैयार हूं
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