की क्यों नही आती पास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये कि जबसे तुम गयी ज़िन्दगी भी गयी जिससे था मन रोशन वो चाँदनी भी गयी होठो पर मेरे बस एक कमाई थी पर तुम गयी तो हँसी भी गयी जुदा हो कर किसकी हुई खास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये जब भी तुम रूठती हो खुद से रूठ जाता हूं मैं घुटता रहता हूं खुद में खुद को सुलगाता हु मैं यही दौलत मिली मुझको तुमसे दूर हो कर कि अब मौन होकर चिलाता हु मैं यू क्यों मुझे की उदास अब तुम पिये क्यों बढ़ाती हो प्यास अब तुम पिये क्यों नही आती हो पास अब तुम पिये
ये जन्म कम पड़ जायेगा सायद उसे भुलाने में याद भी उसकी अजीब हे थकती नहीं हर वक़्त आने में क्या सुकून मिलता हे उसको मुझे रात भर जगाने में कोई दवा मिलती नहीं क्या दर्द हे इस दीवाने में किसका चेहरा खिल गया हे मेरे पलकों के शिवाने में ये जन्म कम पड़ जायेगा सायद उसे भुलाने में दर्द खूब हे दिल में और दिल हे कब्र खाने में कभी भी जा सकता हु मैं फ़रिश्तो के आशियाने में आस पास मौत हे पर डरती हे पास आने में खुदा भी ये मोहलत दे रहा जा खोज जिसे खोजना हे ज़माने में पर वो तो मेरे पास हे मगर समय हे अभी पास आने में लेकिन ये जन्म कम पड जायेगा सायद उसे भुलाने में
शाम होते ही तेरे यादो को आना है ये मेरा दिल है या कोई मैखाना है कभी एक पल की तुझे फुरसत नहीं मिलती की ये सोच ले की तेरा एक दीवाना है इधर मैं सब से मिलता हु पर खुद से नही मिलता आज मुझे तेल से पानी को मिलाना है ये कशमकश ज़िन्दगी में ठहर गया है गम को लिखना भी है और गम छुपाना है सुना हु की वो बहुत बदल चुकी है किसी दिन उसको उसके बारे में बताना है
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