बस यु ही
तेरा चेहरा है वही पर
मिज़ाज़ में बदलाव है
मैं धूप में जल रहा हु
पर तुझको क्या लगाव है
मेरा दर्द ज़रा ज़रा
गीत में ढलता गया
में खुद को तलासते किस
राह पे चलता गया
जो रूह के थे हिस्से कल
वो अनजाने कैसे हुए
दिल भी ये कह टाल देता
न जाने कैसे हुए
दुनिया का था ये नियम
बदलने वाले बदल गए
हम कहाँ तक रोकते
वो जाने वाले थे चल गए
मिज़ाज़ में बदलाव है
मैं धूप में जल रहा हु
पर तुझको क्या लगाव है
मेरा दर्द ज़रा ज़रा
गीत में ढलता गया
में खुद को तलासते किस
राह पे चलता गया
जो रूह के थे हिस्से कल
वो अनजाने कैसे हुए
दिल भी ये कह टाल देता
न जाने कैसे हुए
दुनिया का था ये नियम
बदलने वाले बदल गए
हम कहाँ तक रोकते
वो जाने वाले थे चल गए
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