ऐ कलम
ए कलम तू बता तू क्यों मेरी यार है
तुझे तो मालूम है कि किससे मुझको प्यार है
उसके सिवा तो मेरे लिए सब कुछ दर किनार है
जिसे सब कुछ समझा उसी मुझपे नही ऐतबार है
ये दिव तो आज कल सबके लिए बेकार है
तो कलम तू बता तू क्यों मेरी यार है
जिसका चेहरा खून से तू बनाता हर बार है
वो कभी दोस्त थी मेरी मगर अब दोस्ती बीमार है
कल जहाँ ऐतबार था अब वहाँ दीवार है
पर अब तू मेरा हाथ है तू ही मददगार है
में भी तेरा यार हु तू भी मेरा यार है
Comments
Post a Comment