छोड़ कर अब मुझे

यू क्यो गयी प्रिये छोड़ कर अब मुझे
फीकी लगती है खुशिया तुम बिन सब मुझे
दर्द के गाने गाता हु अब
हस्ता नहीं बस हँसता हु अब
जबसे दूर तू है गयी
खुद से दूरिया बढ़ाता हु अब
दूर जाने का बता दो सबब मुझे
यू क्यो गयी प्रिये छोड़ कर अब मुझे
क्यों तुझे मेरा ख्याल आता नही
क्या तेरा दिल मुझको बुलाता नही
गयी तू जबसे हस्ता हँसता हु मैं
पर ये तमाशा तुझ बिन मुझे भाता नही
मन से अति है हँसी कब, मुझे
यू क्यो गयी प्रिये छोड़ कर अब मुझे

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