Gazal- अभी खामोश रहो

अभी खामोश रहो मेरी उड़ान बाकी है
ये सब हवाएं है अभी आसमान बाकी है

कल उस गली में कोई भूखा नही सोया
लगता है वहाँ कोई इंसान बाकी है

माना आधी रात हो गया पर में सो जाऊ कैसे
मेरी थकी निग़ाह में अरमान बाकि है

तब तक तुझसे चाहत का रिश्ता रहेगा मेरा
जब तक इस लाश में थोड़ा सा जान बाकी है

वो कहते है मुझे देख के मौन हो जाओ
ये कैसे मुमकिन हो मेरे मुंह मे जुबान बाकी है

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