आँखे

तुम नही थी तो बहुत चिलाती थी आँखे
बिन बातो की बातों पे भी रुलाती थी आँखे
तुम लगी रही लब की बात सुनने में लेकिन
तुमको चीख पुकार के बुलाती थी आँखे

तुम क्या जानो , इन आँखों ने क्या क्या तुमसे कहा नही
पर तेरे पास इस के लिए वक़्त रहा नही
तन्हाई में रह कर इसने पूरा दरिया भर डाला
लेकिन तेरे सामने एक आँसू बहा नही

इन आँखों ने कई आँखों को होते दंग देखे हैं
इन आँखों ने अपनो को भी गैर के संग देखे हैं
इन आँखों ने गम खुशहाली, होली दीवाली देखा है
इन आँखों ने रंगों के भी बदले रंग देखे हैं

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