कुछ आँसू ....

कुछ आँसू वो थे जो दुनिया को दिखाये नही
कुछ आँसू को नकार दिया वो हमको भाये नही
कुछ आँसू जान बूझ कर हमने ही छिपाया है
कुछ आँसू देख के कुछ ने ताली बजाया है
कुछ आँसू को उसकेे खातिर हमने भुला दिया
कुछ आँसू आंखों से नही ज़ुबाँ से हमने गा दिया
पर कब तक कोषु मैं , तेरी मेरी कहानी को
कब तक पीयू खुद के ही आँख के पानी को
कब तक  रो रो कर हँसने का जुर्माना दु
आखिर मैं कब तक हर एक जख्मो को कैदखाना दु
आखिर खुदा ये बतलाओ मर मर के कब तक जियूँगा
आखिर कब तक मैं ही हँस हँस के आँसू पियूँगा
चलो हम आशिक़ है सबके साथ ही ऐसा होता
जो जितना हँसता है पहले आखिर मैं उतना रोता है
पर जो मेरी पारो है उसका दुआ तो क़बूल करो
हमको काटे दो सारे उसके हिस्से में फूल करो
वो पगली जो खुश है,तो उसके पाले में खुशहाली रहने दो
मेरी तक़दीर में काली राते है तो काली की काली रहने दो
उसके गुल्लक में खुश हाली रहने दो ,मेरी खली की खाली रहने दो

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