स्कुल क्यों नही आई हो

भोर में मैं बिस्तर छोड़ कर उठ गया
मैं नींद से नाता तोड़कर उठ गया
उसके बाद तेरी तस्वीर का दीदार किया
आखिरकार तेरे आंखों में इजहार किया
करता रहा तेरे ख्वाब और उम्मीद के साथ
दिल में तेरा ख्याल आंखों में नींद के साथ
सोच रहा था आज तुम से क्या बात करुंगा
क्लास में कैसे जाहिर जज्बात करूंगा
क्लास में कदम रखते ही तुम ऐसा मुझे चौकाई हो
जब पता चला तुम स्कूल ही नहीं आई हो
अब क्या करूं सारे ख्वाब अरमान जल गए
ऐसा झटका मिला कि हम हिल गए
पूरे क्लास में तो सब तरफ बच्चों के मेले हैं
हम ही थे यार जो तुम बिन अकेले हैं
हम सदमा खा खाकर चुपचाप बैठे थे
और सारे अध्यापक हमसे  ऐंठे थे
स्कूल आने के पहले बहुत पूजा और जाप किया मैंने
पर अब लग रहा है कि स्कूल आकर पाप किया मैंने
दिल दिमाग सब में तुम ही तुम छाई हो
यही सवाल सबसे है कि तुम स्कूल क्यों नहीं आई हो
अध्यापक क्लास में आते हैं हम थोड़ा सा घबराते हैं
दो-चार ज्ञान देकर वह कुछ पल में चले जाते हैं
जब तेरे बेंच पर निगाह जाती है तुम नहीं वहां पर रहती हो
लगता है अपना सारा लगता है अपना सारा दर्द अकेले सहती हो
सोचता रहता हूं तेरे न आने का सबब क्या होगा
मैं यहां आ गया हूं मेरा अब क्या होगा
आंख खुली पर तेरे याद में सो गया हूं
कैसा था स्कूल आने के पहले अब कैसा हो गया हु
क्लास में सब लोग कहते हैं मुबारक तुम्हें तनहाई हो
क्या हुआ बाबू तुम स्कूल क्यों नहीं आई हो

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