अँधेरी रात

एक दोस्त हमारी खोई हे
इन अँधेरी रातो में।
न जाने किसकी आ गयी
वो भोली बातों में।
कुछ पल पीछे जाओगे
तो यारी सुहानी चलती थी।
क्लास में बस मेरी
उसकी कहानी चलती थी।
न जाने किसका नज़र  लगा ,
रिस्तो में ऐसा  जहर लगा।
 दुआ किया पर न दुआ
 का असर लगा।
जल्दी जल्दी , गम ही गम
आ गए लगने ततो में।
एक दोस्त हमारी खोई
हे इन अँधेरी रातो में।

 दिल भी करे क्या रह
गया एक बेचारा सा।
ये तो अब भी समझता हे  अपना
उसको पर हालत का मारा सा।
देखता हु अब भी उसको
बहुत दूरी से।
शयद दूर होइ वो मुझसे
उसके किसी मज़बूरी से।
सब किस्मत की मर्ज़ी हे ,
कुछ नहीं हमारे हाथो में।
एक  दोस्त हमारी खोई हे
इन अँधेरी रातो मैं।

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