मेरे अन्दर मुझसे ज्यादा .......

भूल जाऊ कैसे ,
जब याद सदा तुम रहती हो ।
मेरे अंदर तो मुझसे
ज्यादा तुम रहती हो ।
भूल जाऊ कैसे ,
जब याद सदा तुम रहती हो ।
क्या लिख दु तेरे बारे
में की ग़ज़ल वो बन जाये ।
मेरे इन कलमों से
ताजमहल वो बन जाये ।
जब भी सोचा कि
अब तुझको भुला जाए ।
तब तब तू मुझको
ओर याद आये ।
आज कल न जाने क्यू
मुझसे जुदा तुम रहती हो ।
भूल जाऊ कैसे ,
जब याद सदा तुम रहती हो।

न तुम कुछ कहती हो ,
न ही में कुछ कहता हूं ।
वो मुझको मालूम है ,
की जिंदा कैसे रहता हूं ।
तेरे बिन यारा जीना
बहुत भारी है।
क्यों कि बाबू तू ही इस
दिल की बहुत दुलारी है।
हमको छोड़ के बाकी
सब पे फिदा तुम रहती हो ।
भूल जाऊ कैसे ,
जब याद सदा तुम रहती हो ।
                             - दिव्यांश पाठक

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