Koun mera ............

तुम तो मेरी अपनी थी ,
दुनिया मैं  एक जमाना था।
टक्को पे अपने जीते थे ,
फूलो से दिल का फसाना था।

यारी के ज़िन्दगी जीते थे
, गलती  पे संग पस्ताना था।
तुम तो मेरी अपनी थी ,
दुनिया में एक जमाना था।

कुछ किस्से हम सुनाते थे ,
कुछ गम वो बताते थे।
कैसे भी हो हालात यारो,
साथ रोते और मुस्कुराते थे।

लगाव था उनको भी मुझसे ,
में भी उनका दीवाना था।
तुम तो मेरी अपनी थी ,
दुनिया में एक जमाना था।

शराब से कोई वास्ता न था ,
वादे को निभाना था।
जब भी फोन आता था उनका।
 एकांत मैं बतियाना था।

सरार सा गुजर वो पल ,
जो प्यारा सा रुबाना था।

तुम तो मेरी अपनी थी ,
दुनिया में एक जमाना था।

बाबु कह के पुकारते थे।
उनको सोना कह के बुलाना था।
ये भी एक जमाना हे।
वो भी एक जमाना था।

बाते अब होती कहा हे ,
दीदार कर के , दिल को समजना हे।
वो भी एक जमाना था।
पर ये केसा जमाना हे।

कल जो मेरी अपनी थी ,
आज वो बेगाना हे।
वो भी एक जमाना था ,
ये भी एक जमाना हे।

बाबु मेरी जानम हे ,
बस आँखों में चश्मे-इ-तराना हे।
तू तो मेरी अपनी थी ,
हर चेहरा अब बेगाना हे।
लगता ऐसा भी एक जमाना हे।
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                                                       By :- Divyansh pathak

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