Ek ladka

एक लड़का तुझको देख के आहे हे भरता -२
वो मंदिर में भी जाता है ,
वो मज़्जिद पे भी जाता है
पर कोई उसके दुआ को काबुल ही न करता
सिकवा क्यों हो मुझसे अब ,
गिल्ला  क्या हे मुझसे अब
मुझे देख क्यों तू बदल देती हे रास्ता
एक लड़का तुझको देख के आहे हे भरता
मै तो यार था तेरा ,
जाने बहार था तेरा
तो अब मेरा नाम सुनके क्यों तेरा पारा हे चढ़ता
 एक लड़का तुझको देख के आहे हे भरता

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