पैसो का रिवाज .............
ए खुदा...... अब तू अपनी गद्दी छोड़ दे
पाप का आलम इतना बड़ा अब निज़ाम मोड़ दे
क्यू हो गया इस दुनिया
मैं पैसो का इतना महत्व
क्या करे गरीब ,
क्या ये दुनिया छोड़ दे
क्यों नोटों के बिना
काबिलियत खो रही हे
ये सब देख सोने की
चिड़िया रो रही हे
क्यों न ख़त्म कर दे पैसो का रिवाज
सायद इंसानियत फिर कर ले धरती पे राज।
पाप का आलम इतना बड़ा अब निज़ाम मोड़ दे
क्यू हो गया इस दुनिया
मैं पैसो का इतना महत्व
क्या करे गरीब ,
क्या ये दुनिया छोड़ दे
क्यों नोटों के बिना
काबिलियत खो रही हे
ये सब देख सोने की
चिड़िया रो रही हे
क्यों न ख़त्म कर दे पैसो का रिवाज
सायद इंसानियत फिर कर ले धरती पे राज।
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