सौरभ स्मृति

चलो छोड़ कर जाना था .... पर ऐसे तो न जाना था
जाने की वजह जाने से पहले उसको तो बताना था

वो अब किससे रोयेगी
वो अब किससे गायेगी
रातो में जो सपने देखे
वो भोर में किसे बताएगी

जो वादा तुमने किया था उस वादे को निभाना था
चलो छोड़ कर जाना था पर ऐसे तो न जाना था

वो सबसे सब कुछ कहती है
पर दर्द में मौन ही रहती है
वो अंदर सहमी-सहमी है
बाहर से लहर-सी बहती है
वो कहती न हमसे कुछ भी , बस सुना हु एक दीवाना था
चलो छोड़ कर जाना था पर ऐसे तो न जाना था

तुम गये ,उससे सवाल हुआ
उसके विरुद्ध हर चाल हुआ
उससे ये क्यों नही पुछे तुम
तुम बिन उसका क्या हाल हुआ
प्रेम जो तुम्हारा सच्चा था तो ये पूछने आना था
चलो छोड़ कर जाना था पर ऐसे तो न जाना था
जाने की वजह जाने से पहले उसको तो बताना था
- दिव्यांश पाठक

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