बाल मजदूरी

टायर के दुकान से लेके चाय के दुकान तक
कई छोटू मिलते है सेठ के मकान तक ।
दिन में काम करते है रात सड़क पर सोते है ,
हमारे देश मे बच्चे भगवान का रूप होते है ।
कभी यह गली खाते है , कभी वहां मार खाते है !
साहब गरीब बच्चे ऐसे ही भूख मिटाते है ।
हम जैसे लोग ही इनको मजबूर करते है !
भूख मिटाने के खतिर माँ बाप से दूर करते है ।
कभी ये रूखा सूखा पाएंगे , कभी बिन खाये सो जाएंगे !
तब में कैसे मान लू कभी अच्छे दिन भी आएंगे ।।

यहाँ लोग बेमिशाल है , यहां बच्चों के दलाल है !
देखिये साहब ये महान भारत के हाल है ।
यह नन्हे नन्हे हाथो में काम की जिमेवारी है !
कौन कहता है मेरे मुल्क में बेरोजगारी है ।
पेट पे फटा कपड़ा है , दो रोटी का तलाश है ।
ये भारत के आने वाले युवा का लिबास है ।
हम होटलो में हज़ार हज़ार फुक के आते है !
पर गरीब  के  बच्चे भूखे सो जाते है ।
सोने के पहले जब हर बच्चे खाना खाएंगे !
तो में मान सकता हु कभी अच्छे दिन भी आएंगे ।

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